बाला साहेब ठाकरे और उसके बाद

बाला साहेब का निधन और उसके बाद उत्पन्न स्थिति को देखेने पर एक शून्यता का आभास होता है. ” मराठा मानुस” की परिकल्पना, लोगों में एक उत्तेजना भरने की कला, अपने पीछे भीड़ जुटाने की ताकत – जो नाम पर मरने मिटने को तैयार हों, सत्ता में रहते हुए भी निर्लिप्त – ऐसा गुण बिरले में ही पाया जाता है. जन नेता के रूप में सही माने में थे.

 

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