विदाई की बेला

विदाई की बेला

004

 

सर्वप्रथम, नमन है इस धरती को,
तपोभूमि रही है सदियों से।
तपस्वियों, महर्षियों के कर्मों से सिंचित,
बरष रहा सौहार्द कण कण से॥
नमन है इस कर्म-भूमि को,
शत कोटि नमन जन-जन को।
पह्चान की परिधि से आगे,
स्वजन, परिजन, सज्जन एवं दुर्जन को॥
हरीतिमा से ढँकी हुई धरा,
प्रकृति ने बिखेर दी अपना अनमोल खजाना।
मस्ती बिखरी है चतुर्दिक,
सालों भर नदियों का यूँ बहना॥

यह बिदाई की बेला है,
या मिलन का पूर्वाभास।
तम से परिपूरित रजनी में,
सुनहरे सूर्योदय का आभास॥
गति तो प्रकृति का नियम है,
ठिठकना है अंत तेरा।
विलग हो जाते संगी साथी,
ना कुछ मेरा ना कुछ तेरा॥
यादें बन जाती अपनी धरोहर,
सीने में समेटे अपनी थाती॥
चल पड़ा तू अगम पथ पर,
धुँधला गंतव्य, सुन्सान राहें चित्कारतीं॥
मिलन जुदाई एक हैं दोनों,
एक सिक्के के दो पहलू की तरह,
आज के बिछड़े कल मिलेंगे,
शोले और शबनम की तरह॥
मिलन में मिलती है खुशी,
जुदाई पे होता है गम।
कभी धूप है तो कभी छाया,
जीवन का यूँ ही चलता क्रम॥
आया था तू यहाँ पर,
आँखों मे थे हसीन सपने।
कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी,
नहीं मालुम- कौन हैं पराये कौन अपने॥
उपस्थित हैं वा अनुपस्थित,
रह आभारी सबों का तू।
एक अनजाने को अपनत्व मिला,
इसी में रच-बस गया तू॥
यहां तूने पाये अपने संगी साथी,
सबों का तुझे साथ मिला।
तूने पाया वो कम नहीं,
फिर क्यों है ये शिकवा ये गिला?
अरमान कुछ पूरे होंगे, कुछ बाकी रहेंगे, रहेंगे,
सर्वदा रहेगा यह अधूरापन।
कभी खुशी, कभी गम की कड़ियाँ,
डूबता-उतराता रहेगा इसी में मन।
समय की गति से बेखबर,
नियति के खेल से अनजान।
सुनहरे सपनों के साए में,
न जाने कितनों से ली वैमनस्य ठान।
फूल भी मिले, काँटें भी मिले,
तू फ़िसलन भरी राहों से गुजरा,
कभी ठोस, कभी दलदली भी मिली,
कभी दौड़ पड़ा और कभी गिरा।
कभी फूलों से पटी नहीं होती,
जीवन की राह अलबेली।
काँटें बिछे होते हैं भरपूर,
किसने कठिनाइयाँ न झेली?
जीवन की इस आपा-धापी में,
उचित अनुचित का ज्ञान न रहा।
अनुकूल-प्रतिकूल बनी परिस्थितियाँ,
बस चलता ही रहा, चलता ही रहा।

वक्त का तकाजा है,

चलने का बुलावा है,

क्यों फँसे उधेड़बुन में,

यह तो दुनिया का छलावा है।

छोड़ दे तू जगह अपनी,

दूसरों को आने के लिए,

भर जाएँगी सारी रिक्तियाँ,

बदलाव है ये भले के लिए।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s


%d bloggers like this: