Posts Tagged ‘दिल’

जाते हुए भी

November 7, 2014

मत जाओ दूर आँखॊं से,
अतृप्त हैं नयन हमारे।
ये दोनों दर्शन के प्यासे,
तेरी चाहत के मारे॥
ख्वाबों की कोई सीमा नहीं,
चाहतों का न कोई अन्त।
जिह्वा बीच में सिमटी हुई,
चारों ओर फैले हैं दन्त॥
सुन्दरता-कुरूपता की माप नहीं,
ये तो आँखों की चाहत है।
दिल से दिल का मामला है ये,
इसमें तो भरी नजाकत है॥